सरकार, सलाह और सहुलियत

Government, advice and support

वाकई मध्यप्रदेश की सरकार गजब है. सिर मुढते ओले पडे की कहावत इस सरकार के मुखिया पर दुरुस्त बैठी है. सहुलियत की राजनीति करने के आदी हो चूके हमारे मुखिया बिना सलाह के चल ही नहीं सकतें. देखिए, न किसान जब उग्र हुए तो हमारे सरकार की अफीमी नींद खुली. सात लोग परलोक सिधार गयें. करोडों की सम्पत्ति नष्ट कर दी गई. राजस्व की हानि अलग. जागे तो ऐसे की अपने है पैर में कुल्हाडी मार ली. रातों रात किसान की उपज का समर्थन मूल्य तय कर दिया गया. निर्देश दे दिये गये किसी ने समर्थन मूल्य से कम में किसानों के समर्थित उपज को खरीदा तो उसे जेल में डाल दिया जायेगा. क्या प्रदेश में इंस्पेक्टर राज लागू है या फिर किसी राजा या तानशाह का राज है ? समर्थन मूल्य सरकार के लिए है व्यापारी के लिए नहीं. आप खरीदों उपज किसने रोका है किसानों को. व्यापारी खुले बाजार में है. किसान स्वंतत्र है. कह दिया रातो रात की किसान को आधा पैसा नगद के रुप में देना होगा. आपकी ही केन्द्र सरकार ने ऐसा नियम बनाया है कि यदि आपके कानून को माना तो जेल नहीं माना तो जेल. यदि किसी को जेल भेजना ही हमारे सरकार का उद्देश्य है तो पहले अपने सलाहकारों को भेज दीजिए. क्या कर रहा था आपका कृषि मंत्रालय. चार चार सालों से एक ही अधिकारी वहाँ डटे है. कितने बार मैदान मे गये नियम बनाते समय. बस अपने आरामदायक ऑफिस में बैठ कर चार आंकडों के आधार पर बना दिया नियम और नीति. हमने भी कर दी घोषणा. याद रखिये जनाब, जिन्हें 2003 में बंटाढार की उपाधि से नवाज कर सत्ता हासिल की थी उन्होनें भी ऐसी ही गलती की थी. उनकी नज़रों में भी व्यापारी चोर हो गया था. जिसका ख़ामिय़ाजा उठा रहे है. कही व्यापारी खिसका तो आपका भी बंटढार निकल जायेगा. श्रीमान, सरकार, सहुलियत और सलाह से ही नही चलती. कुछ काम करना होता है. इंवेट करेगें सिर्फ तत्कालीन रुप से मुद्दों से ध्यान हटा सकते है पर समस्या और चुनौती खत्म नहीं की जा सकती.आग की धधक कम जरुर हुई है लेकिन इसे बुझा मत मान लीजिएगा. थोडी सी चूक इसे विकराल बना सकती है.  

Related posts

Leave a Comment