स्कूली किताबों पर मंत्रिमंडल का निर्णय बनकर रह गया मजाक

school book

म. प्र. सरकार की मंत्रीपरिषद ने शिक्षण सत्र २०१७-१८ से प्रदेश के स्कूलों में एन सी आर टी पाठ्यक्रम की किताबों से शिक्ष्ण कराने का फैसला लिया था, जिसे लागू कराने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की गई| इस फैसले को अमलीजामा पह्नावाने के लिए समाजवादी जन परिषद हाईकोर्ट जाएगी| सजप की तमाम शिकायतों और अपील के बावजूद, आज तारीख में भी वर्ष २०१७-१८ के लिए एक भी स्कूल की सूची शिक्षा विभाग की वेब साईट पर नहीं है- जब्कि यह सूची १ जनवरी २०१७ तक शिक्षा विभाग को आ जानी थी| सजप के राष्ट्रीय सचिव फागराम ने कहा अगर सरकार अपने खुद के मंत्री-मंडल के फैसले को गंभीरता से लागू नहीं करा पाती है, तो फिर वो एक मजाक बनकर रह जाते है|

मुख्यमंत्री शिवराज सिंग चौहान की अध्यक्षता में ८ नवम्बर , २०१६ को हुई मंत्रीपरिषद की बैठक में इस बाबत फैसला लिया गया था| इस फैसले में था: अगले शिक्ष्ण सत्र – २०१७-१८ से म. प्र. के स्कूलों में पहली से सातवीं और ९वी और ११ वी में एन सी आर टी पाठ्यक्रम की किताबों से शिक्ष्ण कराने का बात थी|

सजप के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य अनुराग मोदी ने बताया कि सजप स्कूलों व्दारा अपनी किताबों की सूची शिक्षा विभाग को ना देने का मुद्दा उठाए आज तीन हफ्ते हो गए, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन और सरकार के स्तर पर इस बारे में कोई कार्यवाही नहीं हुई है| सभी शहरों में निजी स्कूल ऐसे प्रकाशकों की किताबे चुनते है: जो, एक तो सिर्फ उनके व्दारा निर्धारित दुकान में मिल सके; और दूसरा- जो बड़ा कमीशन दे|

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