छात्र को 5 हजार तक हर्जाना मिल सकता है, किसी ने नहीं किया आवेदन

गुना कॉलेज का एमए का छात्र रमेश दुबे दो माह से जीवाजी यूनिवर्सिटी में डिग्री के लिए चक्कर काट रहा है। अधिकारी कह देते हैं कि अभी डिग्री आई नहीं है। रमेश को यह नहीं पता कि यदि वह 100 रुपए खर्च कर लोक सेवा गारंटी अधिनियम में आवेदन कर दे तो केवल 2 दिन में ही डिग्री मिल जाएगी। जेयू ने यदि ऐसा नहीं किया तो उसे 500 से लेकर 5 हजार रुपए तक हर्जाना मिल सकता है। यह राशि उस अधिकारी को अपनी जेब से देना होगी, जिसकी लापरवाही रही है।

अकेले रमेश की डिग्री का ही नहीं बल्कि जेयू में माइग्रेशन, नामांकन, अंकसूची में गड़बड़ी जैसी समस्याओं के निराकरण के लिए भटकते छात्रों की समस्याओं के निदान का यह सबसे आसान रास्ता है, लेकिन जानकारी के अभाव में वे इसका लाभ नहीं ले रहे हैं। स्थिति यह है कि विश्वविद्यालयों में इस अधिनियम को लागू हुए साढ़े चार साल हो चुके हैं परंतु जेयू में एक भी छात्र ने अब तक आवेदन तक नहीं किया।

इस तरह किया जा सकता है आवेदन

आवेदन का प्रारूप तय है। आवेदन के साथ लगने वाला 100 रुपए का शुल्क चालान या भारतीय पोस्टल ऑर्डर (आईपीओ) के माध्यम से जमा किया जा सकता है। यह आवेदन जेयू में आवक-जावक पर जमा करना होगा। जेयू को इस अधिनियम का प्रचार, प्रसार करना चाहिए। प्रशासनिक भवन, छात्र सहायता केन्द्र व गालव सभागार में बैनर, पोस्टर लगाना चाहिए। शासन के भी आदेश है कि योजना का प्रचार, प्रसार किया जाए। लेकिन जेयू में ऐसा नहीं हो रहा है।

प्रदेश की महत्वपूर्ण योजना

लोकसेवा गारंटी अधिनियम 2010 देश की पहली इस तरह की योजना है। इसमें लापरवाही करने वाले अधिकारी पर अर्थदण्ड का प्रावधान है। शुरूआत में इस योजना में 9 विभागों की 26 सेवाओं को शामिल किया था। बाद में विभागों की संख्या बढ़कर 16 और सेवाओं की संख्या 52 कर दी गई। 10 अप्रैल 2013 में इस योजना में उच्च शिक्षा विभाग की सेवाओं को भी शामिल किया गया। लेकिन जेयू में 2013 से अब तक एक भी छात्र ने इसके तहत आवेदन नहीं किया है।

जेयू के रिकॉर्ड में यह व्यवस्था, लेकिन नोटिस बोर्ड पर उल्लेख नहीं

– नामांकन, माइग्रेशन के लिए पदाभिहित अधिकारी असिस्टेंट रजिस्ट्रार अभयकांत मिश्रा को बनाया है। दोनों कार्यों के आवेदन के निराकरण के लिए 3 दिन का समय रहेगा। तीन दिन बाद छात्र प्रथम अपीलीय अधिकारी डिप्टी रजिस्ट्रार राजीव मिश्रा को अपील कर सकेगा। उन्हें 7 दिन के अंदर समस्या निपटाना होगी। इस अवधि में भी निराकरण न होने पर द्वितीय अपीलीय अधिकारी रजिस्ट्रार प्रो. आनंद मिश्रा को अपील की जा सकेगी।

– प्रोविजनल डिग्री और मार्कशीट के लिए भी यही अधिकारी रहेंगे। श्री मिश्रा को आवेदन के निराकरण के लिए केवल 2 दिन का समय रहेगा। प्रथम अपील में 7 दिन में मामला निपटाना होगा।

– मार्कशीट में नाम, रोल नंबर, कॉलेज का नाम, अंक या अन्य तरह की गलती होने पर सुधार के लिए भी यही अधिकारी रहेंगे। पहले स्तर पर केवल 2 दिन का समय रहेगा।

-आरडीसी की बैठकों में लिए गए निर्णयों के बाद पंजीयन प्रमाण-पत्र प्रदान करने में देरी पर असिस्टेंट रजिस्ट्रार व कुलपति के निज सचिव यूएस सालसेलर को पदाभिहीत अधिकारी बनाया है। इस स्तर पर आवेदन का निपटारा 15 दिन में करना होगा। इस कार्य के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी डिप्टी रजिस्ट्रार अकादमी को बनाया है।

– थीसिस प्रस्तुति के बाद पीएचडी अवार्ड प्रक्रिया से संबंधित समस्या के निपटारे के लिए भी यही अधिकारी पैनल में हैं।

इनका कहना है

हमारा प्रयास रहता है कि शासन की योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा छात्रों को मिल सके। इसलिए समय-समय पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम की जानकारी दी जाती है। लेकिन अब तक एक भी छात्र ने इसके तहत आवेदन नहीं किया है। योजना का हम प्रचार प्रसार और करेंगे। – प्रो. आनंद मिश्रा, रजिस्ट्रार

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