US से अच्छी रोड बताने पर सीएम शिवराज सिंह चौहान का उड़ा मजाक, 13000 km सड़कें खराब

.मध्यप्रदेश की सड़कें अमेरिका से बेहतर बताने पर सोशल मीडिया पर बुधवार को दिनभर सीएम शिवराज सिंह चौहान का मजाक उड़ता रहा। कोई भी यह मानने को तैयार नहीं है कि प्रदेश की सड़क अमेरिका से अच्छी है। हकीकत यह है कि प्रदेश में 13000 किलोमीटर सड़कें खराब हैं। शहरी क्षेत्रों की 2689 किमी सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। इनकी मरम्मत के लिए 386 करोड़ रुपए की जरूरत है। भोपाल समेत 7 डिवीजन (संभाग) में 1410.63 km डामरीकृत और 1279.04 km सड़कें बनाई जानी हैं। केंद्र ने माना था- देश में मप्र की सड़कें सबसे ज्यादा खराब…

– केंद्र सरकार यह मान चुकी है कि देश में मप्र की सड़कें सबसे ज्यादा खराब हैं। देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसे यहीं होते हैं। रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा मार्च 2017 में राज्यसभा में दिए गए एक जवाब के मुताबिक 2015 में सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण 3070 हादसे केवल मप्र में हुए हैं।
ये है सड़कों का हाल
– 2689 किमी शहरी क्षेत्र की सड़कें बदहाल।
– 8700 किमी स्टेट हाईवे का हिस्सा खराब।
– 6000 करोड़ रुपए चाहिए नई सड़कों के लिए।
क्या ये हादसे आंखें नहीं खोलते?
– केंद्र ने माना- 2015 में गड्‌ढों के कारण मप्र में 3000 से ज्यादा हादसे हुए।
– जबलपुर-रायसेन रोड पर 5 साल में 40 से ज्यादा लोगों की जान चली गई।
ट्विटर पर किस यूजर ने क्या कहा?
– समीर सिद्दीकी ने कहा, “नीम का पेड़ चंदन से कम नहीं, एमपी की सड़कें लंदन से कम नहीं, शिवराज बौरा गया।”
– बिनीता ने कहा,”मामा के लॉलीपॉप रास्ते में ही खत्म हो गए और वाशिंगटन में जुमला फेक गए। सड़क छाप वाला जुमला।”
– सैयद घयासुद्दीन ने लिखा,”शिवराज का बयान सुन मोदी हुए बेहोश, होश आया तो बोले मुझसे बड़ा फेंकू जन्मा”
– मनोजीत ने लिखा, “लगता है सीएम साहब कभी अवधपुरी भ्रमण पर नहीं आए। उन्हें अवधपुरी भ्रमण कराओ वो भी साइकिल से।”
रोड : वॉशिंगटन V/S मध्यप्रदेश
– अमेरिका में यूएस कार्प्स ऑफ इंजीनियर्स मापदंड तय करता है। भारत में इसके लिए इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) है।
– अमेरिका में सुपर पेवमेंट डिजाइन प्रचलित है। एक-एक मटेरियल की जांच होती है।
– भारत में पेवमेंट डिजाइन मेथड से ट्रैफिक इंटेसिटी और सबग्रेड स्ट्रेंथ चैक होती है, लेकिन यह बहुत सटीक नहीं होती।
– अमेरिका में क्लाइमेटिक कंडीशन का ध्यान रखकर सड़कें बनती है। बर्फबारी, ज्यादा बारिश से सड़कें खराब नहीं होतीं।
– भारत में क्लाइमेट के अनुरूप सड़क बनाने की तकनीक इस्तेमाल नहीं होती।
US में मेंटेनेंस भी वैज्ञानिक तरीके से
– अमेरिका में पेवमेंट मैनेजमेंट सिस्टम के तहत सड़कों का मेंटनेंस होता है। जीआईएस बेस्ड मैपिंग से जुड़ी होती है। किसी भी लोकेशन की सड़क की हालत लाइव देखी जा सकती है।
MP में जहां खराब दिखी, वहां मरम्मत
– मप्र में सड़कों के मेंटेनेंस का कोई सिस्टम ही नहीं है। जब जहां नेताओं-अफसरों को सड़क खराब दिखी, उसकी मरम्मत करवाई जाती है, लेकिन इसमें किसी की जवाबदेही तय नहीं है।

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